भारतीय मीडिया में विदेशी संपादक

किसी भी मीडिया ग्रूप में संपादक ही यह तय करता हैं की कौन सी खबर कैसे प्रस्तुत किया जाए या उन्हें प्रस्तुत किया भी जाए या नहीं और ये खबर न सिर्फ अपने देश के नागरीको की मानसिकता को प्रभावित करती हैं बल्कि पुरे विश्व के सामने उस देश का छवि को भी प्रभावित करती हैं जहाँ की ये मीडिया हैं अब आप सोचिये अगर किसी मीडिया ग्रूप की संपादक ही विदेशी हो तो वो किस तरह से उस देश को प्रभावित करती होंगी क्योकि उनकी देशभक्ति तो अपने देश के लिए होंगी न की उस देश के लिए जहाँ की मीडिया में वह संपादक हैं।
आप सोच रहे होंगे में आज ये सब क्यो बता रहा हूँ वो इसलिए की भारत में भी विदेशी संपादक मौजूद हैं जिनमें से एक द हिन्दू की पूर्व संपादक और द वायर का सह संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन जो कि एक अमेरीका का नागरीक हैं और उन्होने किस तरह से हमारे मानसिकता पर चोट पहुंचाने कि कोशिश को वो हम उनके रिपोर्टिंग से पता चल जाता हैं।
All about siddhartha vardhrajan
इसी सिद्धार्थ जी ने गुजारत दंगो से आधारित एक रिपोर्ट गोधरा आउटलुक बनाया था जिसमें उन्होने बहुत ही मनगढ़न्त बाते कही बिना सबूत के जैसे कि अगर गोधरा कांड नहीं भी होती तो भी गुजरात दंगा होता उन्होने तो ये भी मानने से इनकार कर दिया की साबरमती एक्सप्रेस की S-6 बोगी को कोई मुस्लमानो के भीड़ ने नहीं जलाया। उनका मानना था की नरेंद्र मोदी जी ने गोधरा कांड और उसके बाद हुए दंगे किसी साजिश के तहत किया था जिससे उसका फायदा वह चुनाव में ले सके सिद्धार्थ जी के बिना सिर पैर की बात ने सभी को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन उन्हें ये जानना चाहिए कि मोदी जी 2001 से 2014 तक गुजरात की मुख्यमंत्री और उसके बाद 2014 से वर्तमान समय तक भारत का प्रधानमंत्री है इस बीच कोई गुजरात जैसा दंगा क्यो नहीं हुआ।  अभी गुजरात हाई कोर्ट ने भी मोदी जी को निर्दोष मान लिया और गोधरा कांड के मुख्य आरोपी सहीत 31 मुस्लमानो को दोषी तो अब उनका रिपोर्ट झूठा सिद्ध हो ही चूँका हैं ।
Godhra outlook
सुबर्मनयम स्वमी जी ने उनके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में केस भी किया था कि कोई विदेशी नागरिक कैसे भारतीय मीडिया का संपादक हो सकता हैं और उनके देश विरोधी रिपोर्टो को भी दिखाया था बाद में उनके दबाव में बीच केस में उन्हे द हिन्दू से इस्तीफा भी देना पड़ा अब आप सोंच सकते हैं की इतनी सालो तक देश की दूसरी सबसे बड़े अंग्रेजी समाचार पत्र का संपादक होकर पुरे विश्व के सामने भारत की कैसी इमेज बनाई होगी और किस हद तक लोगो की मानसिकता को आघात पहुंचाया होगा।
द हिन्दू से इस्तीफा देने के बाद सिद्धार्थ जी ने अपने अन्य दो साथियों के साथ द वायर नामक आँनलाइन न्यूज वेब पोर्टल बनाई जिसमे भी वो अपनी देश विरोधी propaganda चलाते रहें उन्होने अपनी एक रिपोर्ट में कश्मीर को विवादित कश्मीर कहाँ यहीं नही वो लगातार भारतीय कश्मीर को भारतीय अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर जिसको उन्होने हमशे चुराया हैं और अवैध कब्जा करके रखा हुआ है को आजाद कश्मीर कहते रहते है दुसरे शब्दो में कहुँ तो वो पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं।
वैसे तो उनका सभी आर्टिकलस में देश विरोधी बात मिल ही जायेगी लेकिन में अभी हंदवाड़ा में हुआ एनकाउंटर पर उनकी रिपोर्ट की ही बात करूंगा उन्होने अपने रिपोर्ट में आतंकवादीओ को तथाकथित आतंकी कहाँ जी हा आपने सही सुना तथाकथित आतंकी।।। और तो और उन्होने हमारे शहिदो का भी अपमान किया उन्होने अपनी रिपोर्ट में शहीद को शहीद भी कहने की बजाय ऐसा बताया गया की कोई आम आदमी मरा हो हमारे शहीदो को इससे ज्यादा और अपमान तो हो ही नहीं सकता।
भारत मे जो अभी प्रेस एक्ट चल रहा हैं वो अंग्रेजो के ज़माने का हैं जिसको संसोधन करने की बहुत जरूरत हैं ऐसी फेक प्रोपेगंडा को रोकने के लिए और आपकी जानकारी के लिए मैं आपको बता दूँ की सुब्रमण्यम स्वामी जी के केस से प्रेरित होकर भारत सरकार एक नया प्रेस एक्ट लाने की कोशिश  की थी लेकिन अभी भी लटका हुआ हैं जिसे पास करवाना बहुत जरूरी हैं ऐसे देशविरोधी लेखो और समाचारो को रोकने के लिए। सही मायने मे भारत को अगर किसी से खतरा है तो वो यही फेक प्रोपोगंडा चलाने वाले और देश की अपमान करने वाले भारत मे रहने वाले सम्पादको से ही है।

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