केसे फेक propaganda भारत की छवि को प्रभावित करती हैं

आज हम भारत की एक बहुत बड़ी अंग्रेजी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस की बात करेंगे जिसकी आय 100 मिलियन अमेरीकी डालर से भी अधिक है तो आप समझ ही सकते होंगे कि इसकी पहुँच कहाँ तक हैं।
इसी इंडियन एक्सप्रेस में पाकिस्तानी अखबार न्यूजवीक पाकिस्तान का एक परामर्श संपादक खालिद अहमद का एक आर्टिकल छपा था तो आप सोच सकते हैं कि किस प्रकार उसमें पाकिस्तानी एजेंडा भरा हुआ होगा उन्होने अपनी रिपोर्ट में कहाँ की सुबर्मनयम स्वमी जी ने कहाँ है की " भारत में मुसलमानों को समान नागरीक नहीं माना जाता क्योकि मुसलमान पुरे विश्व के लिए एक खतरा हैं और जहाँ मुस्लिम अधिक होता हैं वहाँ समस्याएं अधिक आती हैं। और इस समस्या के हल के लिए पुरी देश हमारे साथ है। " और यह सब खालिद ने स्वामी जी के एक कनाडा की मीडिया में दी गई साक्षात्कार को तोड़ मोड़कर पेश की।
खालीद अहमद की आर्टिकल
और उनकी इसी रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त राष्ट्र के under security ऐडम डियांग ने सुबर्मनयम स्वमी जी पर आरोप लगाया था इसके लिए स्वामी जी ने इंडियन एक्सप्रेस और ऐडम डियांग दोनो को लीगल नोटिस भी भेजा की किस आधार पर उन्होने उनको ऐसा बोला।
अब सोचिए एक पाकिस्तानी propaganda वाला आर्टिकल संयुक्त राष्ट्र तक को प्रभावित करती हैं तो भारत में ऐसा हजार आर्टिकल हर महीने बनते हैं तो उससे पुरे विश्व के सामने भारत की कैसी छवि बनती होंगी और यही आर्टिकल भारतीयों के मानसिकता पर कैसा असर छोड़ता होगा। इनकी आर्टिकल अधिकतर अंग्रेजी में ही होती हैं जिससे कि वो पुरे विश्व तक अपनी बात को पहुँचा सके।

और यही सब कारणो से हमें अंग्रेजो के जमाने का press act को संशोधन करना जरूरी हैं जिससे कि कोई फेक propaganda भारत के खिलाफ न चला सके। 

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